ग़ज़ल
चारों तरफ विवाद करें तो क्या करें
है नफरत की आग करें तो क्या करें
सबकी अपनी अपनी डफली बजती है
अपना अपना राग करें तो क्या करें
समझाएं भी किसको कोई कम भी नहीं
झट होता नाराज़ करें तो क्या करें
राजनीति का चक्कर बहुत निराला है
मुल्क हुआ बर्बाद करें तो क्या करें
आरोपों से कौन यहां पर वंचित है
सब में है कुछ दाग करें तो क्या करें
कोई लाखों और करोड़ों में कोई
रोटी को मोहताज करें तो क्या करें।
फिर भी भारत सारी दुनिया से अच्छा
इस पर हम को नाज करें तो क्या करें
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