ग़ज़ल जब नाम तेरा लिख लिया दिल की क़िताब में।ग़ज़ल जब नाम तेरा लिख लिया दिल की क़िताब में! फिर तो जरूर आएगा तू मेरे ख़्वाब में!! गजलें लिखीं हैं और कई छंद भी लिखे! मुझ को मिली हैं शोहरतें जैसे ख़िताब में!! ताऊन नफ़रतों की मेरी ज़ीस्त में बढ़ी! अब क्या बताएं क्या रखा है इस इताब में!! जो भी मिला है मुझ को सभी सूद में मिला! अपना किया ही दिख रहा अपने हिसाब में!! क़ासिद को जब भी देखती हूँ सोचती हूँ मैं! कुछ तो जवाब आएगा ख़त के जवाब में!! ..आभा सक्सेना दूनवी

ग़ज़ल 

जब नाम तेरा लिख लिया दिल की क़िताब में! 
फिर तो जरूर  आएगा तू मेरे ख़्वाब में!! 

गजलें लिखीं हैं और कई छंद भी लिखे! 
मुझ को मिली हैं शोहरतें जैसे ख़िताब में!! 

ताऊन नफ़रतों की मेरी ज़ीस्त में बढ़ी! 
अब क्या बताएं क्या रखा है इस इताब में!! 

जो भी मिला है मुझ को सभी सूद में मिला! 
अपना किया ही दिख रहा अपने हिसाब में!!
 
क़ासिद को जब भी देखती हूँ सोचती हूँ मैं! 
कुछ तो जवाब आएगा ख़त के जवाब में!!
 
..आभा सक्सेना दूनवी

टिप्पणियाँ

Alok ranjan ने कहा…
बेहतरीन रचना