ग़ज़ल

मुस्कराने की भी तरकीब बताओ यारों
कोइ हंसती हुई तस्वीर दिखाओ यारों

लोग उलझे हैं यहां अपनी ताजपोशी में
आओ जल्दी से ये दरबार सजाओ यारों

ऐसा कातिल है जिसे देख नहीं पायेगें
उसके ही नाम पर व्यापार चलाओ यारों

क्यों सरेआम मरे लोग दिखाते हो तुम
जो हैं जिंदा उन्हें दो वक्त खिलाओ यारों

सरजमी अपनी है बदनामी भी अपनी होगी
वक्त की मार है दुश्वार दिखाओ यारों

तेज आंधी है ये छप्पर उड़ा भी सकती है
एक होकर के ज़रा रब को पुकारो यारों

सब को पहचानना तो काम बड़ा मुश्किल है
जिन को पहचानो उन्हें और पहचानो यारों

आलोक रंजन इंदौरवी
इन्दौर मप्र

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