आपका हंसी चेहरा
"आपका हसीं चेहरा, माहताब जैंसा है
जिसको लोग पढ़ते हैं, उस किताब जैंसा है
माफ़ कीजिये मेरी, हर ख़ता मुहब्बत में
आपका ख़फ़ा होना, इंक़लाब जैंसा है
क्या करूंगी मैं तुमसे, आज गुलिस्तां लेकर
फूल मेरे दामन में,जब गुलाब जैंसा है
मैं मज़ाजी दुनियां में, और की अमानत हूँ
आपसे मेरा मिलना, सिर्फ ख्वाब जैंसा है
आप इस जगह आकर, क्या दीये जलाओगे
रोशनी का ये आलम, आफ़ताब जैंसा है
ज़िंदगी गुज़ारो तुम, प्यार और मुहब्बत से
आदमी का ये जीवन इक हुबाब जैंसा है
लोग तंज़ करते हैं, "वंदना" गरीबों पर
मुफ़लिसी में जीना भी, इक अज़ाब जैंसा है ...!"
वंदना विशेष गुप्ता
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