आपका हंसी चेहरा

"आपका हसीं चेहरा, माहताब जैंसा है
जिसको लोग पढ़ते हैं, उस किताब जैंसा है
                  
माफ़ कीजिये मेरी, हर ख़ता मुहब्बत में
आपका ख़फ़ा होना, इंक़लाब जैंसा है
                 
क्या करूंगी मैं तुमसे, आज गुलिस्तां लेकर
फूल मेरे दामन में,जब गुलाब जैंसा है
                  
मैं मज़ाजी दुनियां में, और की अमानत हूँ
आपसे मेरा मिलना, सिर्फ ख्वाब जैंसा है
                  
आप इस जगह आकर, क्या दीये जलाओगे
रोशनी का ये आलम, आफ़ताब जैंसा है
                   
ज़िंदगी गुज़ारो तुम, प्यार और मुहब्बत से
आदमी का ये जीवन इक हुबाब जैंसा है
                 
लोग तंज़ करते हैं, "वंदना" गरीबों पर
मुफ़लिसी में जीना भी, इक अज़ाब जैंसा है ...!"

वंदना विशेष गुप्ता
लखनऊ उत्तरप्रदेश

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ग़ज़ल जब नाम तेरा लिख लिया दिल की क़िताब में।ग़ज़ल जब नाम तेरा लिख लिया दिल की क़िताब में! फिर तो जरूर आएगा तू मेरे ख़्वाब में!! गजलें लिखीं हैं और कई छंद भी लिखे! मुझ को मिली हैं शोहरतें जैसे ख़िताब में!! ताऊन नफ़रतों की मेरी ज़ीस्त में बढ़ी! अब क्या बताएं क्या रखा है इस इताब में!! जो भी मिला है मुझ को सभी सूद में मिला! अपना किया ही दिख रहा अपने हिसाब में!! क़ासिद को जब भी देखती हूँ सोचती हूँ मैं! कुछ तो जवाब आएगा ख़त के जवाब में!! ..आभा सक्सेना दूनवी