भर देती हो शब्द सुनहरे

भर देती हो शब्द सुनहरे,गाकर मीठी तान 
काले अक्षर बन जाते हैं, मोती की मुसकान ,
 कोयल छेड़ो फिर से तान ,कोयल ......

कुहू-कुहू की रट लगाकर ,किसको पास बुलाती ?
किस वन में छुपती हो जाकर, कहाँ से फिर आ जाती ?
तेरे स्वागत में पेड़ों ने, पहने नये परिधान ।
कोयल छेड़ो फिर से तान ,कोयल .......!

बूढ़े बरगद की स्मृति में, पीपल की छाया में,
तुम्हें देखने की उत्कंठा, जीवन की माया में,
भरती नूतन प्राण,कोयल छेड़ो फिर से तान,
कोयल छेड़ो फिर से तान .......!

कश्मीरा सिंह ।

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ग़ज़ल जब नाम तेरा लिख लिया दिल की क़िताब में।ग़ज़ल जब नाम तेरा लिख लिया दिल की क़िताब में! फिर तो जरूर आएगा तू मेरे ख़्वाब में!! गजलें लिखीं हैं और कई छंद भी लिखे! मुझ को मिली हैं शोहरतें जैसे ख़िताब में!! ताऊन नफ़रतों की मेरी ज़ीस्त में बढ़ी! अब क्या बताएं क्या रखा है इस इताब में!! जो भी मिला है मुझ को सभी सूद में मिला! अपना किया ही दिख रहा अपने हिसाब में!! क़ासिद को जब भी देखती हूँ सोचती हूँ मैं! कुछ तो जवाब आएगा ख़त के जवाब में!! ..आभा सक्सेना दूनवी