भर देती हो शब्द सुनहरे
भर देती हो शब्द सुनहरे,गाकर मीठी तान
काले अक्षर बन जाते हैं, मोती की मुसकान ,
कोयल छेड़ो फिर से तान ,कोयल ......
कुहू-कुहू की रट लगाकर ,किसको पास बुलाती ?
किस वन में छुपती हो जाकर, कहाँ से फिर आ जाती ?
तेरे स्वागत में पेड़ों ने, पहने नये परिधान ।
कोयल छेड़ो फिर से तान ,कोयल .......!
बूढ़े बरगद की स्मृति में, पीपल की छाया में,
तुम्हें देखने की उत्कंठा, जीवन की माया में,
भरती नूतन प्राण,कोयल छेड़ो फिर से तान,
कोयल छेड़ो फिर से तान .......!
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