गीत
नारी
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ईश्वर की श्रेष्ठ कृति अनमोल वरदान हूँ
नूतन सृजन की अमूल्य अवदान हूँ ।
सब कहते मैं हूँ एक अबला बेचारी,
पर आज मैं नहीं अबला हूँ सबला नारी।
हाँ ये सच है मैं नारी हूँ मैं नारी हूँ,
मैं इस जीवन में कभी नहीं हारी हूँ।
फूल जैसी कोमल मन सुंदर नारी हूँ,
वक्त आने पर काँटों सी कठोर मैं हूँ।
अपनों की खातिर हर खुशी कुर्बान की ,
फिर भी लोगों ने कहा क्या तेरा है अस्तित्व ।
हाँ ये सच है मैं नारी हूँ मैं नारी हूँ ,
मैं इस जीवन में कभी नही हारी हूँ।
अपनो ने ही तोड़ा और बिखेर दिया ,
आँसुओं के समंदर में डुबो दिया।फिर भी मैंने जीवन में हार न मानी,
कुछ नया करने की मन में फिर ठानी।
नए हौंसले नए सपनों ने ली उड़ान,
आज मैंने खुद बनाई अपनी पहचान।
समाज में नारी शिक्षा की जोत जगाई,
हर नारी को जीवन की नई राह दिखाई।
साबित्री मिश्रा
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