गीत

गीत

जब- जब याद तुम्हारी आई।
आँखों ने तब नींद गंँवाई।

नागिन - सी डसती तनहाई।
आग उगलती धवल जुन्हाई।
बिस्तर चुभन शूल सी देता,
सन्नाटों में रात बिताई।
नयनों में बदली सी छाई।
जब - जब याद तुम्हारी आई।

कभी चुराई हँसी पराई।
जाने क्या-क्या विधि अपनाई।
चैन कहाँ पलभर को मिलता,
जबसे अपनी फटी बिबाई।
पोर पोर में पीर समाई।
जब जब याद तुम्हारी आई।

भरी भीड़ में निपट अकेले।
रास नहीं आते अब मेले।
बिना तुम्हारे जग सूना सा,
काम न आते पाई - धेले।
सूरत नहीं गयी बिसराई।
जब जब याद तुम्हारी आई।
            ● बलराम सरस,एटा उ.प्र.

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