ग़ज़ल आपके दिल में जो हो कहा कीजिए

आपके दिल में जो हो कहा कीजिए
पर मेरे दिल में हरदम रहा कीजिए

ख़ानदानी रिवाज़ों पे मत जाइये
इश्क़ का मामला है ख़ता कीजिए

बोतलों का नशा तो उतर जायेगा
खत्म हो ना कभी वो नशा कीजिए

जिंदगी  ये गुज़र  जाएगी  चैन से
उसके घर का कभी तो पता कीजिए

जिसने इंसाफ की पैरवी कर दिया
क्या ज़रूरत है उससे दग़ा कीजिए

फ़र्ज़ जिसने सियासत में जाना नहीं
आपका हक़ है उसको दफा कीजिए

ज़िंदगी का तजुर्बा यही कह रहा
बेवफाई नहीं बस वफा कीजिए

आलोक रंजन इंदौरवी

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ग़ज़ल जब नाम तेरा लिख लिया दिल की क़िताब में।ग़ज़ल जब नाम तेरा लिख लिया दिल की क़िताब में! फिर तो जरूर आएगा तू मेरे ख़्वाब में!! गजलें लिखीं हैं और कई छंद भी लिखे! मुझ को मिली हैं शोहरतें जैसे ख़िताब में!! ताऊन नफ़रतों की मेरी ज़ीस्त में बढ़ी! अब क्या बताएं क्या रखा है इस इताब में!! जो भी मिला है मुझ को सभी सूद में मिला! अपना किया ही दिख रहा अपने हिसाब में!! क़ासिद को जब भी देखती हूँ सोचती हूँ मैं! कुछ तो जवाब आएगा ख़त के जवाब में!! ..आभा सक्सेना दूनवी