बड़ी बहनें

बड़ी बहनें

कभी बड़ा होने नहीं देतीं
ये बहनें बड़ी
सुख दुःख में जीवन के
हरदम रहती खड़ी

जीवन के कुछ साल 
बस साथ में बिताती हैं
बड़ी बहन छोटी से जल्दी
अपने ससुराल चली जाती है
पर दूर से बाँध कर रखती
सदा छोटी से डोर
दोनों बहनें पकड़ कर रखती
इस डोर के ओर छोर
जब भी मिलती लगा देतीं
स्नेह की झड़ी
कभी बड़ा होने नहीं देतीं
ये बहनें बड़ी

कभी सखी से ये बनती
कभी हैं माँ ये बन जातीं
सुख में चाहे न आयें
पर दुःख में हरदम ये आतीं
छोटी कितनी भी बड़ी हो
इनके लिए छोटी ही रहती
इनकी लाड़ दुलार डाँट में
वात्सल्य की धारा बहती
संघर्षों में भी इनका सम्बल
देता मुस्कानों की झड़ी
कभी बड़ा होने नहीं देतीं
ये बहनें बड़ी

तृप्ति मिश्रा

(कवियत्री तृप्ति मिश्रा अपनी बहन कवियत्री अर्पणा जोशी के साथ)

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

ग़ज़ल जब नाम तेरा लिख लिया दिल की क़िताब में।ग़ज़ल जब नाम तेरा लिख लिया दिल की क़िताब में! फिर तो जरूर आएगा तू मेरे ख़्वाब में!! गजलें लिखीं हैं और कई छंद भी लिखे! मुझ को मिली हैं शोहरतें जैसे ख़िताब में!! ताऊन नफ़रतों की मेरी ज़ीस्त में बढ़ी! अब क्या बताएं क्या रखा है इस इताब में!! जो भी मिला है मुझ को सभी सूद में मिला! अपना किया ही दिख रहा अपने हिसाब में!! क़ासिद को जब भी देखती हूँ सोचती हूँ मैं! कुछ तो जवाब आएगा ख़त के जवाब में!! ..आभा सक्सेना दूनवी