नारी सम्मान में

नारी

माॅं है वो जननी है, 
बेटी बहन भगिनी है।
वो एक रिश्तों की डोर है,
नारी नहीं कमजोर है
नारी  सबसे प्यारी है
महकाती घर फुलवारी है।

देवो की वो जन्मदात्री।
 हां वो एक  नारी है।
तभी तो जग में प्यारी है।

बच्चों को वो जानती है।
प्रसव वेदना सहती है।
सब बच्चों को सुला सुला 
ख़ुद रात रात भर जगती है।
सुबह उठे से देर रात तक
सारे फ़र्ज़ निभाती है।

उसकी बड़ी जिम्मेदारी है।
वो एक नारी है।
जग में सबसे प्यारी है।

अपने दर्द का ज़िक्र ना करती
कोल्हू बैल सा खटती रहती
भूल के सारी व्यथा हृदय की
बस हॅंसती ही रहती है।
जिम्मेदारी खूब निभाती,
तब नारी कहलाती है।

देख रेख़ करना बच्चों की
सॅंस्कार भरना बच्चों में
भूल के अपने सब सपनों को 
बच्चों को सबल बनाती है।
तब नारी कहलाती है।

आओ  इसका मान बढ़ाएं
नारी का सम्मान बढ़ाएं।
नहीं करें अपमान कभी हम
नारी का अवसान कभी हम
सुसंस्कृत  हो परिवार हमारा
बच्चों को सभ्य बनाने खातिर
सुंदर कृतत्व निभाती है।।

तब नारी कहलाती है।

शक्ति का स्वरूप है नारी।
पुरुषों पर भी पड़ती भारी
निज अस्तित्व की रक्षा में
वो  बन जाती तलवार दुधारी

भ्रूण हत्या ना हो अत्याचार
बन्द हो बिटियों का सॅंहार
वर्ना परिणाम दुष्कर होगा।
नारी का गर तिरस्कार होगा।।

मणि बेन द्विवेदी
वाराणसी

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