ग़ज़ल जो जुल्मों सितम की वकालत करेंगे

जो जुल्मों सितम की वकालत करेंगे
वो कैसे यहां फिर मुहब्बत करेंगे करें

अगर लौट आया जो बचपन हमारा
तो फिर से वही हम शरारत करेंगे

ज़माने की नज़रों से बचना है मुश्किल
नहीं हर तरफ हम शिकायत करेंगे

वो गैरों से करते हैं रिश्तों की बातें
कहां हमपे इतनी इनायत करेंगे

कसम तोड़ सकते नहीं जिंदगी भर
वतन की हमेशा हिफाज़त करेंगे

आलोक रंजन इंदौरवी

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ग़ज़ल जब नाम तेरा लिख लिया दिल की क़िताब में।ग़ज़ल जब नाम तेरा लिख लिया दिल की क़िताब में! फिर तो जरूर आएगा तू मेरे ख़्वाब में!! गजलें लिखीं हैं और कई छंद भी लिखे! मुझ को मिली हैं शोहरतें जैसे ख़िताब में!! ताऊन नफ़रतों की मेरी ज़ीस्त में बढ़ी! अब क्या बताएं क्या रखा है इस इताब में!! जो भी मिला है मुझ को सभी सूद में मिला! अपना किया ही दिख रहा अपने हिसाब में!! क़ासिद को जब भी देखती हूँ सोचती हूँ मैं! कुछ तो जवाब आएगा ख़त के जवाब में!! ..आभा सक्सेना दूनवी