दीप जलाकर देहरी पर

दीप जलाकर देहरी पर जब तुलसी की पूजा होगी
हृदय कुंज में कुंज बिहारी मुरती की पूजा होगी

नकारात्मक राजनीति का ये भी ऐसा पहलू है
जब कुर्सी पर बैठ गए तो कुर्सी की पूजा होगी

डर डर कर के जीने वालों को वो आज समझते हैं
उल्टी-सीधी उनकी बंदर घुड़की की पूजा होगी

अपनी संस्कृति की मर्यादा हमको आज बचाना है
चलो दशहरे के दिन भाला बरछी की पूजा होगी

मंदिर खुलने और बंद होने की सीमा निश्चित है
मन मंदिर में कान्हा तेरी मरजी की पूजा होगी

आलोक रंजन इंदौरवी

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ग़ज़ल जब नाम तेरा लिख लिया दिल की क़िताब में।ग़ज़ल जब नाम तेरा लिख लिया दिल की क़िताब में! फिर तो जरूर आएगा तू मेरे ख़्वाब में!! गजलें लिखीं हैं और कई छंद भी लिखे! मुझ को मिली हैं शोहरतें जैसे ख़िताब में!! ताऊन नफ़रतों की मेरी ज़ीस्त में बढ़ी! अब क्या बताएं क्या रखा है इस इताब में!! जो भी मिला है मुझ को सभी सूद में मिला! अपना किया ही दिख रहा अपने हिसाब में!! क़ासिद को जब भी देखती हूँ सोचती हूँ मैं! कुछ तो जवाब आएगा ख़त के जवाब में!! ..आभा सक्सेना दूनवी