छंदमुक्त कविता
जय माँ शारदे
शीर्षक -(#सहारा )
विधा: मुक्त छन्द कविता
दिनांक: 03/05/22
सहारा
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काश डूबते को कोई #सहारा दे देता ।
नैया पार हो जाती किनारा मिल जाता ।
कहीं तूफानों में घिर कर जीवन - दीप न बुझ जाए ।
इस तम के अंधकार में कोई सहारा मिल जाता ।
मन बुझ न जाए दुनिया के इन तीक्ष्ण बाणों से ।
कोई वायदों को निभा बाणों से बचाने वाला मिल जाता ।
कहीं चाहत के फूल मुरझा न जाए अपनों के बुरे इरादों से ।
मन जब उलझा हो तो अपनों का सहारा मिल जाता ।
हाथ बढ़ा कर देते जो साथ कष्टों से बाहर निकाले ।
वही हमदर्द जीवन में होता तो सहारा मिल जाता ।।
डॉ रश्मि "रत्न"
स्वरचित मौलिक रचना
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