दिल कहेगा कि सियासत लिखना

दिल कहेगा कि सियासत लिखना 
फर्ज ये है कि मुहब्बत लिखना

मुहब्बत लिख अगर नहीं सकते 
कम से कम आप हकीकत लिखना

सच अगर है नहीं पता पूरा   
यही अच्छा कि उसे मत लिखना

जानते आप बात हैं  जितनी  
आप उतनी ही इबारत लिखना

मत कहो यह कि ज़माना है बुरा
हुआ जो आप वो फकत लिखना

बचेंगे शब्द मिटेंगे हम जब
समझकर इनको विरासत लिखना

यूं ही कुछ भी लिखने से अच्छा है
किसी अपने को एक खत लिखना

 न किसी और से सही  बेहतर
आज 'यश' कल से तो उन्नत लिखना

यशपाल सिंह यश

टिप्पणियाँ

बेनामी ने कहा…
बहुत सुंदर

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ग़ज़ल जब नाम तेरा लिख लिया दिल की क़िताब में।ग़ज़ल जब नाम तेरा लिख लिया दिल की क़िताब में! फिर तो जरूर आएगा तू मेरे ख़्वाब में!! गजलें लिखीं हैं और कई छंद भी लिखे! मुझ को मिली हैं शोहरतें जैसे ख़िताब में!! ताऊन नफ़रतों की मेरी ज़ीस्त में बढ़ी! अब क्या बताएं क्या रखा है इस इताब में!! जो भी मिला है मुझ को सभी सूद में मिला! अपना किया ही दिख रहा अपने हिसाब में!! क़ासिद को जब भी देखती हूँ सोचती हूँ मैं! कुछ तो जवाब आएगा ख़त के जवाब में!! ..आभा सक्सेना दूनवी