दिल कहेगा कि सियासत लिखना
दिल कहेगा कि सियासत लिखना
फर्ज ये है कि मुहब्बत लिखना
मुहब्बत लिख अगर नहीं सकते
कम से कम आप हकीकत लिखना
सच अगर है नहीं पता पूरा
यही अच्छा कि उसे मत लिखना
जानते आप बात हैं जितनी
आप उतनी ही इबारत लिखना
मत कहो यह कि ज़माना है बुरा
हुआ जो आप वो फकत लिखना
बचेंगे शब्द मिटेंगे हम जब
समझकर इनको विरासत लिखना
यूं ही कुछ भी लिखने से अच्छा है
किसी अपने को एक खत लिखना
न किसी और से सही बेहतर
आज 'यश' कल से तो उन्नत लिखना
यशपाल सिंह यश
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