खुशियों से कर लूॅं श्रृंगार
श्रृंगार
खुशिओं से कर लूँ श्रृंगार,
गम से करूँ बातें दो चार ।।
खामियों से करती इकरार ।
जीवन के मोती हजार ।।
खाशियत का करते ब्यापार
जिंदगी से करते ना प्यार ||
जिंदगी से हुई मुलाकात ।
खुशिओं की आई बारात ।।
नयनों से ऐसे न निहार ।
जीवन में आएगी बहार ।।
@ डॉ मीरा त्रिपाठी पांडेय
मुम्बई महाराष्ट्र, भारत ।
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