ग़ज़ल ज़रा सी बात पर ही लोग क्यूं कर रूठ जाते हैं।

ज़रा सी बात पर ही लोग क्योंकर रूठ
जाते हैं।
बहुत मजबूत दिल रखते हैं फिर भी टूट जाते हैं।

किसी को ज़िन्दगी मौक़े कभी ज़्यादा नहीं देती
समय की तेज़ आंधी में भी रिश्ते छूट जाते हैं।

किसी को देख लें हंसते हुए तो लोग शातिर कुछ
लुटेरों की तरह ख़ुशियों को अक्सर लूट जाते हैं।

कोई ये मान बैठा था कभी हम खिल न पाएंगे।
मगर हम बीज हैं जो बंजरों  में फूट जाते हैं।।

- शैलजा सिंह

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ग़ज़ल जब नाम तेरा लिख लिया दिल की क़िताब में।ग़ज़ल जब नाम तेरा लिख लिया दिल की क़िताब में! फिर तो जरूर आएगा तू मेरे ख़्वाब में!! गजलें लिखीं हैं और कई छंद भी लिखे! मुझ को मिली हैं शोहरतें जैसे ख़िताब में!! ताऊन नफ़रतों की मेरी ज़ीस्त में बढ़ी! अब क्या बताएं क्या रखा है इस इताब में!! जो भी मिला है मुझ को सभी सूद में मिला! अपना किया ही दिख रहा अपने हिसाब में!! क़ासिद को जब भी देखती हूँ सोचती हूँ मैं! कुछ तो जवाब आएगा ख़त के जवाब में!! ..आभा सक्सेना दूनवी