बज्म ए ख़यालात और तसब्बुर के साये ग़ज़ल संग्रह का लोकार्पण।

"बज्म ए ख़यालात "और "तसब्बुर के साये" ग़ज़ल संग्रह का लोकार्पण 
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आज साहिबाबाद स्थित टू मीडिया कार्यालय में एक साथ दो पुस्तकों का लोकार्पण (बज़्म ए ख़यालात )  श्रीमती पुष्प लता राठौर की और (तसव्वुर के साये) आलोक रंजन इंदौरवी की  पुस्तक का लोकार्पण हुआ । लोकार्पण के बाद कवि गोष्ठी का आयोजन किया गया जिसमें अध्यक्षता ओम प्रकाश प्रजापति नें की और मुख्य अतिथि के रूप में अशोक छोकर जी उपस्थित रहे विशेष अतिथि में आलोक रंजन इंदौरवी श्रीमती रेखा अस्थाना और श्रीमती पुष्प लता राठौर जी रहे।
राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना के महासचिव प्रभु लाल चौधरी एवं टू मीडिया के अध्यक्ष ओम प्रकाश प्रजापति जी का बहुत-बहुत आभार। कवि गोष्ठी में देश के जाने माने साहित्यकार और ग़ज़ल कारों ने भाग लिया। जिसमें पूनम माटिया जी, ऊषा श्रीवास्तव सीमा सागर ,सीमा गर्ग जगदीश मीणा जी, श्रीमती रेखा अस्थाना जी आदि प्रमुख हैं।

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ग़ज़ल जब नाम तेरा लिख लिया दिल की क़िताब में।ग़ज़ल जब नाम तेरा लिख लिया दिल की क़िताब में! फिर तो जरूर आएगा तू मेरे ख़्वाब में!! गजलें लिखीं हैं और कई छंद भी लिखे! मुझ को मिली हैं शोहरतें जैसे ख़िताब में!! ताऊन नफ़रतों की मेरी ज़ीस्त में बढ़ी! अब क्या बताएं क्या रखा है इस इताब में!! जो भी मिला है मुझ को सभी सूद में मिला! अपना किया ही दिख रहा अपने हिसाब में!! क़ासिद को जब भी देखती हूँ सोचती हूँ मैं! कुछ तो जवाब आएगा ख़त के जवाब में!! ..आभा सक्सेना दूनवी