ग़ज़ल कभी छुप छुपके मिलना
गज़ल
कभी छुप छुप के मिलना औ'र कभी इकरार करना भी।
मुसीबत हो गया है यार अब तो प्यार करना भी।
मुहब्बत में जो चाहे हो सभी कुछ अच्छा लगता है,
कभी इनकार करना भी कभी तकरार करना भी।
किसी से कम मिला है तो बहुत से है मिला ज्यादा,
जो मिलता है खुशी से सीखिए स्वीकार करना भी।
किया है प्यार बचपन में सभी मां बाप ने सबको,
हमारा फर्ज उन पर प्यार की बौछार करना भी।
कोई भी काम नामुमकिन कहां होता है दुनियां में,
अगर हो हौसला मुमकिन समंदर पार करना भी।
मिला जो ज्ञान गौतमबुद्ध मीरा औ'र कबीरा से,
कि उनसे सीख ले दुनियां उसे विस्तार करना भी।
कदम रखने से पहले प्यार में 'प्रेमी' सबक सीखो,
करे गर प्यार कोई प्यार से मनुहार करना भी।
.......✍️ सत्य कुमार प्रेमी
नोएडा, गौतमबुद्ध नगर, उ प्र.
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