ग़ज़ल आपके दिल में जो हो कहा कीजिए
आपके दिल में जो हो कहा कीजिए पर मेरे दिल में हरदम रहा कीजिए ख़ानदानी रिवाज़ों पे मत जाइये इश्क़ का मामला है ख़ता कीजिए बोतलों का नशा तो उतर जायेगा खत्म हो ना कभी वो नशा कीजिए जिंदगी ये गुज़र जाएगी चैन से उसके घर का कभी तो पता कीजिए जिसने इंसाफ की पैरवी कर दिया क्या ज़रूरत है उससे दग़ा कीजिए फ़र्ज़ जिसने सियासत में जाना नहीं आपका हक़ है उसको दफा कीजिए ज़िंदगी का तजुर्बा यही कह रहा बेवफाई नहीं बस वफा कीजिए आलोक रंजन इंदौरवी