गीत मैं अपनी पहचान बनूंगी
बाधाएं कितनी आ जाएं कदम नहीं डिगने दूंगी सनातन और प्रेम को कभी नहीं झुकने दूंगी सत्य सनातन संस्कृति अपनी मैं इसका सम्मान करूंगी मैं अपनी पहचान बनूंगी भारत माता के चरणों में नित नित शीश झुकाऊं में देश प्रेम की अलग जगह कर इस पर बलि बलि जाऊं मैं भारत की संप्रभुता का विस्तृत में अभी अभियान बनूंगी मैं अपनी पहचान बनूंगी अपने आदर्शों का सम्यक पालन करती जाऊंगी सद्विचार दृढ़ संकल्प ओं से आगे बढ़ती जाऊंगी अपने बलबूते के बल पर भारत की में शान बनूंगी मैं अपनी पहचान बनूंगी निरूपमा त्रिवेदी इन्दौर मप्र